21 फरवरी को क्या कानूनी दरिया को पार कर पायेगा संतों के आस्था का सैलाब !

छलावा बनकर रह गया मंदिर निर्माण को लेकर राजनैतिक पार्टियों का वादा- स्वरूपानंद सरस्वती 

राम मंदिर निर्माण हेतु प्रयाग राज से अयोध्या पहुंचेंगे संतो के कदम

 
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 एन.के मौर्य मंडल ब्यूरो (IA2Z)गोण्डा– सुप्रीम कोर्ट मे चल रहे विवादित राम मंदिर के मामले का फैसला न आने से संतों के सब्र की सीमा अब खत्म होता दिखाई दे रहा है, जिसे लेकर कुम्भ के मेले मे हुए 3 दिवसीय धर्म सांसद मे द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के अगवाई मे राम मंदिर के शिलान्यास हेतु 21 फरवरी को अयोध्या के पावन भूमि पर कूंच करने का प्रस्ताव पारित किया गया, जिस पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
     
     बताते चलें कि विवादित बाबरी मस्जिद के ढाँचे को कार सेवकों ने सन 6 दिसंबर 1992 को ढहा दिया था, जिसका मामला इलाहाबाद न्यायालय मे   चला, जहाँ विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्सों मे बांटा गया, जिसका राम मूर्ति का पहला हिस्सा राम लला विराजमान को सौपा गया, वहीँ दूसरा हिस्सा राम चबूतरा व सीता रसोंई निरमोही अखाड़े के हिस्से में आया जबकि तीसरे हिस्से की देखरेख सुन्नी वफ बोर्ड को सौंपा गया, अवगत हो कि सुप्रीम कोर्ट मे मंदिर निर्माण का मामला अभी विचाराधीन है, जिसका कोई नतीजा खुल कर सामने अभी नहीं आया है, लेकिन मंदिर को लेकर संतो के आस्था के सैलाब मे सियासत के हुक्मरानो के खिलाफ नफरत की उबाल आनी शुरू हो गयी है, जिसका नतीजा ये हुआ कि प्रयाग में हुए कुम्भ मेले के 3 दिवसीय धर्म सांसद मे द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द के अगुवाई मे हजारों संतों व नागा साधुओं ने ये फैसला लिया है कि आने वाली 21 फरवरी 2019 को वो सभी एकजुट होकर प्रयाग राज से अयोध्या के पावन भूमि पर पहुंचकर नंदा, जया, भद्रा व पूर्णा चार शिलाओं के साथ राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे। 



राजनैतिक पार्टी के वश मे नहीं है मंदिर का निर्माण– स्वारूपनंद सरस्वती

   मंदिर निर्माण को लेकर द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपा नन्द सरस्वती का कहना है कि सियासत के सूरमा कभी भी नही बनवा सकते मंदिर, इनका वादा लोगों के लिए छलावा है, क्योंकि इसे बनाने के लिए सत्तारूढ़ होना पड़ेगा, और सत्तारूढ़ की शर्त है कि संविधान की शपथ लेनी पड़ेगी, और ये संविधान धर्म निरपेक्ष है, ऐसे में चाहे कांग्रेस पार्टी हो या भाजपा कोई भी इसका निर्माण नही करवा सकता।



लोगों के दिमाग को कचोटते सवाल

   तमाम संतों द्वारा कराये जा रहे मंदिर के शिलान्यास को लेकर लोगों के दिलो दिमाग को कई सवाल कचोट रहे हैं, लोगों का मानना है कि जब अदालत का फैसला अभी तक नही आया है, और केंद्र सरकार की ओर से भी कोई नतीजा खुल कर सामने नही आया है,ऐसे मे कानून के सामने संतों के कदम क्या मंदिर के शिलान्यास तक पहुँच पायेंगे, ये सवाल एक यक्ष प्रश्न की तरह है जिसका जवाब फिल्हाल वक्त के आईने मे कैद है।

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