शहीदों के खून से और कब तक भीगता रहेगा धरती माँ का दामन

 

फिर टूटी सुहागिनों की चूड़ियां, फिर बहे माँ के आंसू

 
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एन.के मौर्य / नवल पाण्डेय

दर्द के सैलाब मे सुलगते कुछ सवाल

भारत माँ की रक्षा के लिए देश के जवान सरहद पर रहकर दुश्मनो के हरकतों पर नजरें निगेबान रखते हैं, ताकि वो अपने घृणित मंसूबों में सफल न हो पायें, शायद यही बात पाकिस्तान को नागवार गुजरती है और हमेशा भारत को नुक्सान पहुंचाने की साजिशें रचता रहता है, हमेशा की तरह इस बार भी पुलवामा सरहद के आवन्तीपुरा के गौरीपुरा मे भी कायरता का सबूत देकर अब्दुल रसीद गाजी की मदद से रऊफ के हैंडलिंग मे इंसानियत के गुनहगार आदिल अहमद के जरिये सीआरपीएफ बटालियन पर 300 किलो का ग्रेनेट बम ऑपरेट करवाकर अब तक 42 जवानो को मौत की नींद सुलाया है, जिससे पूरा देश गमजदा है, हर दिल में यहाँ जहाँ बदले की आग धधक रही, वहीँ हर आँखों मे अश्कों का सैलाब उमड़ा हुआ है, सबके जुबान पर ही सवाल है कि और कब तक शहीदों के खून से धरती माँ का दामन लाल होता रहेगा, और कब तक यहाँ टूटती रहेंगी सुहागिनों की चूड़ियां ?



देश की सेवा करने वाले सीआरपीएफ के शहीद जवानो को क्या पता था कि दिनांक 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के आवन्ती गौरीपुरा मे अचानक आतंकी हमले के बाद वो धरती माँ के गोद में हमेशा के लिए समा जायेंगे, चर्चा के मुताबिक़ आखिरकार पाकिस्तान मे पल रहे इंसानियत के गुनहगार जैशे सरगना मौलाना मसूद अजहर के वादे को सकारात्मक करने के लिए  हैंडलर रऊफ असगर ने कश्मीर मे रह रहे आदिल अहमद को अपने साथ मिलाया, और घटना को अंजाम देने के लिए प्लानिंग करने लगा, इसी क्रम मे दिनांक 14 फरवरी 2019 को जब जम्मू कश्मीर क्षेत्र के पुलवामा स्थित आवन्तीपुरा के गौरीपुरा से सीआरएफ बटालियन गुजर रही थी तब घात लगाए आदिल अहमद हैवानियत का नंगा नाच नाचते हुए बटालियन के गाड़ी पर 300 किलो कस खतरनाक ग्रेनेट बम का इस्तेमाल किया, जिससे गाड़ी के चिथड़े उड़ गए, और अब तक 42 जवान जहाँ दर्दनाक मौत का शिकार हुए वहीँ अब भी कई जवान जीवन मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।


भाई भतीजे की मौत का बदला लेने के फिराक मे था                        मौलाना मसूद अजहर

दर्दनाक हादसे के पीछे आईएस से तालुकात रखने वाले मौलाना मसूद अजहर का नाम आ रहा है, बताते चलें कि दिनांक 6 नवंबर 2017 को जब जवानों के सर्च आपरेशन के दौरान पुलवामा क्षेत्र  मे मसूद अजहर का कुख्यात आतंकी भतीजा उस्मान मारा मारा गया था, तभी मसूद अजहर ने बदला लेने की कसम खायी थी, और अब्दुल रसीद गाजी व रऊफ से मिलकर पाकिस्तान मे घृणित अंजाम देने की प्लानिंग करने लगा, जिसका बागडोर उसने रऊफ असगर को सौंप दिया, जिसने उक्त प्रकरण को अंजाम देने के लिए कश्मीर के गंडीबाग काकपोरा (पुलवामा) मे रह रहे मासूम आदिल अहमद को चुना, जो बाद मे इनके लिए काम करने लगा, और काफी सतर्कता से इसने वीरवार के दिन पुलवामा मे सीआरपीएफ के गाड़ी पर 300 किलो का ग्रेनेट बम गिरा कर अपने हैवानियत के चेहरे को बेनकाब किया है। 

कौन है आदिल अहमद, कैसे बना मासूम से हैवान

बताया जा रहा है कि विस्फोटकों से लदी गाड़ी लेकर सीआरपीएफ के काफिले में विस्फोट करने वाला आतंकी आदिल अहमद डार उर्फ वकास  विस्फोटस्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित गंडीबाग काकपोरा (पुलवामा) में ही रहता था।मासूम आदिल दसवीं मे तीन बार फेल हो चुका था, इसी बीच रऊफ असगर उसे मिला, जिसने भोले भाले आदिल का दिल जीतकर उसे अपने मिशन का हिस्सा बना लिया, आदिल अहमद के आत्मघाती बनने से सब हैरान हैं। वह 19 मार्च 2018 को आतंकी बना था। शुरु में वह जाकिर मूसा के साथ रहा और अप्रैल 2018 में वह जैश का हिस्सा बना था। आतंकी बनने से पहले वह काकपोरा हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। वह स्कूल में पढ़ाई के अलावा एक स्थानीय आरा मशीन पर भी काम करता था। वहां वह लकड़ी की पेटियां बनाता था, वह अपना काम शुरु करना चाहता था। उसके बारे में कहा जाता है कि वह अपने मां-बाप को बहुत प्यार करता था। उसकी कोई बहन नहीं थी, और अकसर वह अपने मां-बाप के कपड़े व बर्तन तक खुद साफ करता था। बीते साल वह एक दिन स्कूल के लिए निकला और फिर आतंकी बन गया।

 आतंकी आग मे सुलगते कुछ सवाल

कश्मीर घाटी में आत्मघाती आतंकियों की कतार में आदिल अहमद डार कोई पहला स्थानीय युवक नहीं है, लेकिन विस्फोटकों से लदे वाहन को लेकर सुरक्षाबलों पर हमला करने वाला वह अब तक का दूसरा स्थानीय आत्मघाती आतंकी है। इस हमले में सीआरपीएफ के 45 जवान शहीद हो गए हैं, जिसको लेकर पूरे देश में शोक का माहौल है, आतंकी आग को लेकर हर दिलों मे कुछ इस तरह के सवाल सुलग रहे हैं ,और कब तक टूटती रहेंगी सुहागिनों की चूड़ियां, और कब तक बहते रहेंगे अपने कलेजे के टुकड़ों के लिए माँ के आंसू, आखिर कब बुझेगी ये आतंकी आग, कब घूम सकेंगे आजाद परिंदे की तरह आजाद भारत के लोग ?

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