गफ़लत मे वार करते हैं कुत्ते भी शेर को

….✍✍ एन.के मौर्य की कलम से

गफ़लत मे वार करते हैं कुत्ते भी शेर को

हिम्मत न थी वो बुझ दिल मारते दिलेर को
गफ़लत मे वार करते हैं कुत्ते भी शेर को

 करता रहा तूँ वार सदैव पीठ पर ज़ालिम
खुशियों की रौशनी न समझ इस अंधेर को

बस आ चला है वक़्त तेरे मौत का काफ़िर
जल्दी ही देखेगा तूँ भारत के कहर को

होगी न कोई बस्ती न कोई घर मिलेगा
 तूँ भूल जाएगा अपने ही शहर को

 मंडरा रहा है सर पे तेरे मौत का साया
तूँ भाग सकेगा नही मंजिल की ओर को

 होगा न कफन लाशों पे, वो हाल करेंगे
ऊँगली से गिन न पाएगा लाशों की ढेर को

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