दर्द तो रुकने का नाम नही लेता है, सब्र से दिल ही यहाँ काम नही लेता है

दर्द तो रुकने का नाम नही लेता है, सब्र से दिल ही यहाँ काम नही लेता है
पिता की मौत से उजड़ गयी घर की खुशियां, मिला उम्र भर का गम


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एन.के मौर्य-Ia2z ब्यूरो देवीपाटन मंडल

गोण्डा– लाड प्यार से पली प्रीती व खुश्बू दोनों बहनो को भाई न होने का गम न था क्योंकि पिता विद्यासागर उन्हें अपने पलकों पर बिठा कर रखते थे, दोनों बेटियों को अपने माता पिता पर गर्व था, क्योंकि वो जानती थीं कि उनके तनिक गम मे उनके माता पिता व्याकुल हो उठते थे, इसलिए वो अपने मिष्ठान की दुकान पर भी अपने बेटी को अपने आँखों के सामने रखते थे,

  मगर अफ़सोस जिस सागर के दुकान पर कल तक लोगों की भीड़ लगी रहती थी, हंसी की किलकारियाँ गूंजती थी,वहां आज वीरानगी का साया मंडरा रहा है, जहाँ सिर्फ और सिर्फ अतीत की यादें समायी हुई है, दूसरी ओर गम की सैलाब मे डूबे बेटियों का दर्द रुकने का नाम ही नही ले रहा है।

बताते चलें कि वजीरगंज क्षेत्र के गोण्डा अयोध्या मार्ग स्थित जमादार पुरवा निवासी विद्या सागर पहले गोण्डा मे रहते थे, लगभग 20 वर्ष पहले वो गोण्डा छोड़कर वजीरगंज मे आ गये, और यहाँ उन्होंने कस्बे के हाईवे मार्ग पर चाय मिष्ठान की दुकान शुरू कर दी, संयोगवश अच्छे स्वभाव के कारण दुकान ठीक ठाक चलने लगा, विद्या सागर व उनकी पत्नी मालती देवी बेटा न होने के कारण अपने दोनों बेटियों प्रीती व खुश्बू बेटे की भाँति जान से ज्यादा प्यार करते थे, कुछ दिनों के बाद उन्होंने अपनी बड़ी बेटी प्रीती की शादी अयोध्या श्रृंगारघाट निवासी आशीष के साथ कर दी, तत्पश्चात छोटी बेटी खुश्बू दुकान पर साथ रहकर अपने माता पिता का हाथ बटाने लगी, अवगत हो कि

   कुछ ही दिनो पहले खुश्बू के पिता ने खुश्बू की गोद भराई की थी, उसने सोंचा था कि इसी मार्च महीने मे अच्छी मुहूर्त देख उसकी शादी कर देगा, उसे क्या पता था कि दो महीने की जिंदगी भी उसके नसीब मे नही है, हुआ भी ऐसे दिनांक 20 फरवरी 2019 को उसकी नातिन सानवी का जन्म दिन था, परिवार में खुशनुमा माहौल था, खुशियों की किलकारी गूँज रही थी, मगर क्या पता था कि इन खुशियों के पीछे उम्र भर गम छिपा है जो सारी उम्र रुलाती रहेगी, बेटी प्रीती के बेटी का जन्म दिन मनाने के बाद विद्यासागर अपनी पत्नी के साथ स्कूटी द्वारा गोण्डा मे एक वैवाहिक कार्यक्रम मे शामिल होने चले गए,

    अवगत हो कि रात्रि लगभग 12.30 बजे जब दोनों अपनी स्कूटी UP43 -AA- 7794 से घर की तरफ आ रहे रहे तो ज्यों ही वो मौत के हादसे को अंजाम देने वाली डेंजर जोन अचलपुर के पास पहुंचे तो सामने से अयोध्या की तरफ से आ रही बेकाबू इंडिगो सीएस कार ने उन्हें जोरदार ठोकर मार दी, हादसा इतना गंभीर था कि इंडिगो कार उन्हें रौंदते हुए आगे जाकर रुकी, जिसमे विद्यासागर के शरीर के चिथड़े उड़ गए, और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गयी, जबकि उसकी पत्नी मालती को 108 सेवा से सीएचसी वजीरगंज लाया गया जहाँ हाथ की हड्डी व कमर पर भारी चोटें आने से उसे सीएचसी वजीरगंज से गोण्डा रिफर कर दिया गया, जहाँ एक प्राइवेट नर्सिंग होम में अब भी इलाज के दौरान वह जिंदगी और मौत के बीच साँसे ले रही है, और दूसरी ओर जिस दुकान पर ख़ुशी की किलकारियाँ गूंजती थी, आज वहां वीरानगी का साया दस्तक दे रहा है।

 अब कौन उठाएगा बेटी के नाज और नखरे, कौन पोछेगा आँखों के अश्क

बताते चलें कि खुश्बू व प्रीती दोनों बहनो का रो रो कर बुरा हाल है, दोनों अब भी बाहें फैलाकर पापा को पुकार रही हैं, अभागिन बेटी को क्या पता था कि जिस घर से उसकी डोली जाने वाली है उस घर से डोली के पहले उसके पिता की अर्थी निकलेगी, अब कौन उसे देगा सहारा, कौन पोछेगा उसके आंसू, यह सोंचकर बेटियां पागल सी हो गयी हैं, यहाँ हर इंसान मालती देवी के ठीक होने की दुआएं कर रहा है, ताकि पिता के बाद ये बच्चे बिन माँ के बच्चे न कहलायें।

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