पत्रकारों का आलम अब ऐसा हुआ  बाईट के खातिर ख़बरें भी रुकने लगी

 आईना सच का यारों ये धुंधला हुआ
अब तो बाईट पे खबरें सब चलने लगी

 थानो मे चाय की चुस्की भरते हैं ये
 माँ बहन रोके दामन भिगोने लगी

 नजर आये न पीड़ित जे आंसू इन्हें
  जो साहब कहें वही छपने लगी

 पत्रकारों का आलम अब ऐसा हुआ
 बाईट के खातिर ख़बरें भी रुकने लगी

  मेरे भारत का चौथा स्तम्भ देख लो
  लड़खड़ा के ये कैसे बिखरने लगी

 कौन कैसा है सब जानते हैं यहाँ
 ये हवाएँ भी इन पर अब हंसने लगी

ऐसे पत्रकारों को “एन.के” का है नमन
 रोती माँ जिनके कारण हंसने लगी

 ….✍✍ एन.के मौर्य की कलम से

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