अजब कोटेदार का गजब खेल ! मुर्दे से बात कराने का दे रहा है चुनौती

 

 मृतक उपभोक्ता बैपता को जिन्दा बताकर उसके नाम पर खारिज कर रहा है राशन
       
 
अगर आप में है जज्बा सत्य को खोज कर सामने लाने का बनना चाहते हैं सच्चे कलम के सिपाही करना चाहते हैं राष्ट्र सेवा तो संपर्क करें :- +91 8076748909

एन.के मौर्य (IA2Z ब्यूरो देवीपाटन मंडल)

वजीरगंज (गोण्डा) सीएम से लेकर डीएम तक जहाँ खाद्यान प्रणाली वितरण के घोटाले को रोकने के लिए सम्बंधित अधिकारियों को प्रकरण में प्रभावी कार्यवाही का सख्त निर्देश दे रहे हैं,वहीँ विकासखंड वजीरगंज स्थित धनेश्वरपुर का कोटेदार मुर्दों के नाम पर भी कई दिनों से खाद्यान सामाग्री वितरण कर रहा है, इसका राज खुलने पर  अपने काले करतूतों पर पर्दा डालने के लिए मुर्दे को भी जिन्दा बताकर उससे मिलवाने का दावा कर रहा है, मगर सच तो यही है कि उपभिक्त बैपता के उसका पति सुक्खे को मरे लगभग 3 वर्ष  बीत चुके हैं, बावजूद इसके वो कोटेदार से राशन डकार रहे हैं।



कोटेदारों द्वारा गाँवों में किये जा रहे खाद्यान प्राणाली के नियमित वितरण को लेकर शासन प्रशासन द्वारा कोटेदारों को सख्त निर्देश है कि प्रत्येक अंतोदय कार्ड उपभोक्ताओं को 35 किलो राशन वितरित किया जाए, मगर वजीरगंज के ग्राम धनेश्वरपुर मे बेखौफ कोटेदार द्वारा सारे नियम कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, यहाँ का कोटेदार अपने तरीके से खाद्यान का वितरण करता है, बताते चलें कि कोटेदार लल्लन वर्मा के उक्त काले कारनामो का चिट्ठा लिखित रूप से  दिनांक 01 फरवरी 2019 को एसडीएम के सामने उपभोक्ता शकील पुत्र सलामत ने शिकायती पत्र के जरिये खोला है, जिसमे उपभोक्ता द्वारा दर्शाया गया है कि उक्त कोटेदार जालसाज किस्म का व्यक्ति है, जिसने न तो मिटटी का तेल वितरण किया है और उपभिक्ताओं को बराबर खाद्यान सामग्री वितरित किया है, चर्चा के मुताबिक़ यहाँ अंतोदय कार्ड धारकों को 25 किलो राशन दिया जाता है जबकि नियमानुसार उन्हें 35 किलो मिलना चाहिये, इतना ही नहीं यहाँ आये दिन अनियमिताओं की गंगा बहती है मगर जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

कार्ड संख्या पर अब भी है मुर्दों का वजूद कायम

सूत्र बताते हैं कि यहाँ के अंतोदय कार्ड संख्या नंबर 218120123243 मे आज भी शाहजहाँ पत्नी समीउल्लाह का नाम अंकित है जो कि मर चुकी है बावजूद इसके बिना फेरबदल किये ही उसी नाम पर उसके पति को राशन खारिज किया जा रहा है, इसी तरह बैपता पत्नी सुक्खे का कार्ड संख्या 218120123244 भी कार्ड पर अंकित है, जबकि ये पति पत्नी दोनो ही मर चुके हैं, इसके बावजूद उनके सगे सम्बन्धियों को उनके नाम पर ही राशन दिया जा रहा है। इस सन्दर्भ मे जब एसडीएम तरबगंज से बात करने की कोशिश की गयी तो कई बार रिंग बजने के बाद भी उनका फोन नही उठ सका।

सेक्रेटरी के बोल

प्रकरण के सन्दर्भ मे जब सेक्रेटरी आफ़ाक से यह पूछा गया कि धनेश्वरपुर गांव की बैपदा पत्नी सुक्खे दोनों लोग क्या अभी जीवित हैं तो उनका कहना था कि बता नही पाऊंगा, उनसे जब यह पूछा गागा कि मृतक प्रमाण पत्र तो आप ही जारी किये होंगे तो बोले फाइल पास न होने के कारण मै कुछ कह नहीं सकता, यहाँ हैरानी की बात तो यह है कि उक्त गाँव से सटे गाँव मे ही सेक्रेटरी रहते हैं बावजूद इसके ये सच बताने मे हिचकिचाते रहे।


 कोटेदार बोला गाँव मे अब भी रह रही है बैपता

उक्त सन्दर्भ मे जब कोटेदार से बात हुई तो उन्होंने कहा शाहजहाँ तो मर चुकी है मगर बैपता अभी जीवित है, जब संवाददाता ने यह कहा कि क्या गाँव आने पर इनसे मुलाक़ात हो जायेगी, तो उसने कहा आप आईये हम मिलवायेंगे, जब कि ग्राम वासियों के अनुसार बैपता व उसके पति को मरे लगभग 3 वर्ष बीत चुके हैं, अब देखना तो यह है कि मौत के मुँह में समायी बैपता को ये कोटेदार मृतक लोक से बुलाकर कैसे मिलायेगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
WhatsApp chat