बदहाली के आगोश मे सिमटकर रह गया सिद्ध पीठ श्री गौरेश्वर नाथ मंदिर

 

 आज भी झेल रहा है उपेक्षा का दंश


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एन.के मौर्य (Ia2z मंडल ब्यूरो)

गोण्डा -शिव शक्ति का रूप माने जाने वाले गौरेश्वर नाथ मंदिर के चमत्कारी शिवलिंग पर  जलाभिषेक करने वाले शिवभक्तों की सारी मुरादें पूरी होती हैं, यहाँ श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चना करने वाले भक्त कभी भी खाली हाथ नही जाते।महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ भारी संख्या मे शिव भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा अर्चना किया, मगर अफ़सोस सिद्ध पीठ होने के बावजूद यह मंदिर विगत कई वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहा है।

अपने भक्तों के अपार प्रेम को देखते हुए मात्र बेल पत्रों पर खुश होने वाले औघड़दानी भोले शंकर का चमत्कार किसी से छिपा नही है, इन्हें किसी विशेष स्थान से नही बल्कि भक्तों से प्रेम रहता है जिनका उद्धार करने के लिए चमत्कारी शिवलिंग का उत्पत्ति अक्सर ही झाड़ियों व जंगलों मे होता आया है, ठीक इसी तरह सत्यपीठ श्री गौरेश्वर नाथ महादेव मंदिर के शिवलिंग की उत्पति जिले के वजीरगंज क्षेत्र के ग्राम महादेवा मे हुई थी, जहाँ पूजा अर्चना करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

कैसे उत्पन्न हुआ चमत्कारी शिवलिंग

माना जाता है कि करीब 700 वर्ष पूर्व वजीरगंज कस्बे से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम महादेवा मे जहाँ आज घनी बस्ती है वहां वक़्त के उस दौर मे भयानक जंगल हुआ करता था,इसके पास ही एक तालाब था जहाँ एक गरीब दम्पति झोपड़ी बनाकर अपने जीवन का निर्वाह किया करते थे, कहा जाता है कि बरसात के दिनो मे एक रात स्वप्न मे आकर उनसे भगवान शिव जी बोले कि तुम्हारे झोपड़ी के पास ही शिवलिंग प्रकट हुआ है, तुम एक मंदिर तैयार करवाओ,जिससे बरसात के आंधी पानी मे उसकी रक्षा हो सके, भगवान शिव की यह बात सुन बुजुर्ग पुजारी के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आयी और वह गरीबी के चादर को खोलकर कर भगवान शिव के चरणों में गिर पड़ा, तब देवादि देव भगवान शंकर ने उसे सांतना दिलाते हुए कहा कि कल यहाँ घनघोर बरसात होगी और उस समय भरे हुए तालाब से  जो मछलियाँ पानी के बहाव से उक्त शिवलिंग से टकराएंगी वो वो चांदी मे परवर्तित हो जाएंगी, उन मछलियों से जो धन मिलेगा उससे तुम मंदिर का निर्माण करवाना, मगर ध्यान रहे कि उन मछलियों पर किसी का पैर न लगने पाए, यह कहकर भगवान शंकर विलुप्त हो गए और सपना टूट गया। बताते चलें कि दूसरे दिन घनघोर बारिश होने लगी, पास का तालाब पानी से लबालब भर गया, तालाब से बह कर शिवलिंग से टकराने वाली  मछलियाँ चांदी मे परवर्तित होने लगी, मानना है की इसी बीच उस रास्ते से एक धोबी गुजर रहा था जिसने पानी के साथ बहती मछलियों को देख उसे पैरों से रोकना चाहा, लोगों का मानना है कि धोबी जाति के उस युवक द्वारा ऐसा करने से मछलियाँ चांदी में परवर्तित होना बंद हो गईं।

पाप बढ़ने के साथ ही कुएं से विलुप्त हो गया चांदी से भरा हांडा

ज्ञातत्व हो कि श्री गौरेश्वर नाथ महादेव मंदिर के सामने ही एक चमत्कारी कुआं है, यहाँ के 70 वर्षीय पुजारी श्री जोगिन्दर दास का कहना है कि उक्त कुएं मे कई बच्चे गिर चुके हैं मगर उन्हें खरोंच तक न आई, इतना ही नही मंदिर में हुए कई चमत्कार के साथ साथ कुएं को भी लेकर पुजारी जोगिन्दर दास का कहना है कि बचपन मे इस कुएं के अंदर हमने भी चांदी के सिक्कों से भरा हांडा देखा था, जिसे निकालना आसान ही नही असंभव था, भीषण बरसात मे कुआं भरने पर यदि कोई सिक्कों के हांडा को पकड़ने की कोशिश करता भी था तो वो चमत्कारी हांडा नीचे चला जाता था।

 कैबिनेट मंत्री से जुड़ी है जनता की आस

समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले सिद्ध पीठ पर आज भी समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। इस सिद्धपीठ के आस पास न तो श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था है और न ही ठहरने की व्यवस्था है, वक़्त के थपेड़ों को सहकर टूट कर बिखर रहे इस मंदिर पर बदरंगी का रंग आज भी बरकरार है। बताते चले कि जमादार पुरवा निवासी रामपाल व जन सहयोग द्वारा मंदिर के अंदर हाल मे टाईल्स लगवाया गया है, इसके अतिरिक्त मंदिर का हाल बद से बद्तर है, यहाँ न तो धार्मिक ट्रस्ट व धर्म के ठेकेदारों की निगाहें पड़ती है,और न ही पुरातत्व विभाग ही इस पर मेहरबान है, अवगत हो की कुछ दिनों पहले यहाँ जब श्री गौरेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर पंडित गणेश जी महाराज के 41 दिवसीय भव्य शोभा यात्रा के दौरान सूबे के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने शिरकत किया था तो उन्होंने मंदिर के जीर्णों उद्धार के लिए  लोगों से प्रस्ताव देने  की बात कहकर यह आश्वासन दिया था कि हम मंदिर के जीर्णों उद्धार हेतु उक्त प्रस्ताव को पारित कराकर यथा संभव मदद करवायेंगे, चर्चा के मुताबिक़ लोगों द्वारा प्रस्ताव को तो अवगत करा दिया गया, मगर मंदिर आज भी पहले की तरह बदहाली के आगोश मे सिमटा हुआ है।

 

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